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Friday, 17 July 2020
मॉ
हर स्थल पर भगवान्
का वास,
मुमकिन न था ,
इसलिए मॉ का अवतार उन्होंने है बनाया ।
ममता की है वो मुरत ,
मासूम सी है उसकी सूरत ,
प्रेम, दया और करुणा ,
इस में सजी हुई है मेरी मॉ।
अगर चोट लगे मुझे ,
दर्द उसके मुख पर झलके ,
रक्त मेरे घॉव से निकले ,
पर आंसू उसकी आंखो से बहे।
नोकझोंक होती रहे हमारी ,
पल भर में रूठना ,
पल भर में गुस्सा होना ,
और पल भर में
एक -दुसरे को मनाना ।
हॉ, पता है मुझे मॉ ,
मैं करती हू बहुत शैतानीयॉ ,
परंतु शैतानी न करु ,
तो गुस्से में छिपा मेरी मॉ का प्यार कैसे जानू।
मेरा सहारा मेरी 'मॉ',
मॉ का सहारा हू 'मैं',
एक-दूसरे में है हम बसे,
यह देख प्रभु भी हर्षित हो उठे।
- सुविध्या
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